केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
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जंतर मंतर पर जश्न
CJP नेताओं ने कहा, लड़ाई अभी खत्म नहीं
झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तक आंदोलन जारी रहेगा
अविकल उत्तराखण्ड
नई दिल्ली। देश भर में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे देशव्यापी छात्र-युवा आंदोलन के दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
पिछले एक माह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में उनकी इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दा बनी हुई थी। यह आंदोलन देश के विभिन्न राज्यों के अलावा ब्रिटेन समेत अन्य देशों में भी फैल गया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने छात्रों के भविष्य, राष्ट्रीय एकता और देशभर में बने हालात को देखते हुए यह निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि जंतर-मंतर और देशभर में उत्पन्न स्थिति का लाभ “राष्ट्रविरोधी ताकतें” उठाएं तथा छात्र किसी कानूनी उलझन में फंसें।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि शिक्षा सुधार के लिए वे चार दशकों से काम कर रहे हैं और नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी।
परीक्षा रद्द की तथा पुनर्परीक्षा आयोजित कराई। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और इसी भावना के साथ उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला लिया है।
उधर, इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। सबसे पहले पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं को श्रद्धांजलि दी गयी।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक आंदोलन की शेष मांगों को भी पूरा नहीं किया जाता। CJP नेतृत्व का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय और आंदोलनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न किए जाने संबंधी मांगों पर सरकार को ठोस निर्णय लेना होगा।
CJP के प्रवक्ताओं ने भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी “गैर-समझौतावादी” मांग थी, जिसे सरकार ने स्वीकार किया है। हालांकि, उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे के लिए नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए शुरू हुआ था। इसलिए शिक्षा क्षेत्र में संस्थागत सुधार होने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
छात्र संगठनों और आंदोलन से जुड़े नेताओं ने इसे देश के युवाओं की लोकतांत्रिक ताकत का प्रतीक बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और संगठित जनदबाव से व्यवस्था में जवाबदेही तय कराई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि झुकती है दुनिया ,झुकाने वाला चाहिए। CJP नेता ने कहा कि कोई भी डरे नहीं। कहा कि, मृत स्टूडेंट्स के परिजनों को मुआवजा व आंदोलनकारियों से मुकदमे वापस होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

बॉक्स
मेरे युवा साथियों,
मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।
किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।
इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।
पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।
परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।
मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूँ तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूँ। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।
पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।
भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है।
देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।
जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।
मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूँगा।
प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूँगा।
आपका,
धर्मेंद्र प्रधान

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