कॉरिडोर की हालत खस्ता हाथियों का मूवमेंट ग्रामीण क्षेत्रों में-

कॉरिडोर की हालत खस्ता हाथियों का मूवमेंट ग्रामीण क्षेत्रों में-
मनोज काण्डपाल की रिपोर्ट –
हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों के मूवमेंट के लिए जरूरी कॉरिडोर की हालत बहुत खस्ता हो चुकी है , गौला कॉरिडोर पर अतिक्रमण कर मकान बनाए जा चुके हैं तो वही दूसरी ओर जंगलात ने आबादी से दूर आरक्षित वन क्षेत्र में फतेहपुर गदगदिया कॉरिडोर पर खाई खोद दी है, जिस कारण हाथी लगातार आबादी की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि उनके खानपान के लिए समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, पिछले कुछ महीने में 70 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फसल चौपट होने पर मुआवजे के लिए काश्तकारों ने प्रभागीय कार्यालय में आवेदन किए हैं ,
वही पूर्व में हाथी हरिद्वार के पास से जंगल से होते हुए खटीमा पीलीभीत होते हुए गोरखपुर तक मूवमेंट करते थे, यह मूवमेंट जंगलों के आपस से जोड़ने वाले कॉरिडोर के माध्यम से होता था,
जो इस समय लगभग बंद हो चुका है,
वही वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कुमाऊ में कोसी, फतेहपुर ,गदगदिया ,गौला, किलपुर ,सुरई और बूम ब्रह्मदेव कॉरिडोर स्थित है ,इन कॉरिडोर के माध्यम से वन्यजीव मूवमेंट किया करते हैं, इसमें गौला कॉरिडोर पर 80 के दशक में हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा हो चुका है, इसके आसपास दूसरे संस्थानों को वन्य भूमि दी जा चुकी है, वही फतेहपुर गदगदिया कॉरिडोर पर जंगल के दोनों और वन्य विभाग ने खाई खोद डाली है ,ऐसे में हाथियों का मूवमेंट प्रभावित हो रहा है ,वही टांडा रेंज की बात करें तो जंगलात ने रुद्रपुर मार्ग पर खाई खोद डाली, साथ ही वन विभाग ने जहां पर सोलर फेंसिंग लगाई है वह देखभाल के कारण उपयोग में नहीं आ रही, बमेठा बंगर में तेल डिपो के पास सोलर फेंसिंग लगाई तो गई थी पर वह भी निष्क्रिय हो चुकी है, जिस कारण हाथियों का मूवमेंट लगातार वहां के ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा रहा है,
इनमें प्रभावित इलाके -हल्दुचौड का क्षेत्र, गौलापार चोरगलिया क्षेत्र ,रामपुर रोड से सटे आबादी वाले इलाके, लामाचौड क्षेत्र ,वहीं रामनगर का छोई सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है,

अभी तक बचाव के लिए आजमाएं गए इंतजामत-
हाथी को रोकने के लिए दीवार का निर्माण ,टेंटिकल सोलर फेंसिंग और खाई खोदना, इत्यादि है,