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August 6, 2026

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कोरोना वाले मरीजों में इस गंभीर बीमारी का बढ़ रहा खतरा, जानें ये कितनी खतरनाक और क्या हैं लक्षण

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अल्जाइमर के खतरे को बढ़ा सकती है

अल्जाइमर की बीमारी से जुड़े बायोमार्कर के लेवल में विकास की संभावना अधिक देखी गई. एमिलॉयड प्रोटीन के कारण अल्जाइमर की बीमारी का खतरा बढ़ता है.

इंपीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर ने पाया है कि जिन लोगों में कोविड-19 का इलाज किया गया. उनमें अल्जाइमर की बीमारी से जुड़े बायोमार्कर के लेवल में विकास की संभावना अधिक देखी गई. एमिलॉयड प्रोटीन से जुड़े बायोमार्कर के लेवल में वृद्धि हुई थी और इसका असर चार साल की उम्र बढ़ने के बराबर था. जिसमें सबसे अधिक प्रभाव गंभीर कोविड-19 के साथ अस्पताल में भर्ती लोगों में देखा गया.

एमिलॉयड एक आम प्रोटीन है जो शरीर में कई तरह के काम करता है. लेकिन बीटा-एमिलॉयड (Aβ) नामक प्रोटीन के असामान्य रूप का निर्माण कई बीमारियों का एक प्रमुख कारण है.निष्कर्षों से पता चलता है कि हल्का या मध्यम कोविड-19 बायोलॉजिकल को तेज कर सकता है जो मस्तिष्क में बीमारी को बढ़ावा देने वाले एमिलॉयड के निर्माण में योगदान करते हैं.

कोविड-19 और अल्जाइमर के बीच संबंध स्थापित करने में जुटी है. अल्जाइमर की बीमारी दिमाग संबंधी खराबी है जो ब्रेन सेल्स मरने की वजह बनती है और जिसके नतीजे में याद्दाश्त की हानि होती है. अल्जाइमर की बीमारी में किसी शख्स के सोचने की क्षमता को बर्बाद करती है, जिसकी वजह से उसका सामान्य कामकाज करना मुश्किल हो जाता है. कोविड-19 में दिमाग को शिथिल करने की क्षमता है. इसके कारण लॉन्ग टर्म न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे लोगों में अल्जाइमर की संभावना को भी बढ़ा दे.

दिमाग पर कोविड-19 का प्रभाव और जुड़े लक्षण

कोविड-19 के नतीजे में, हल्के से गंभीर सूजन पीड़ितों को दिमाग में दौरा और स्ट्रोक हो सकता है. संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों ने भी मानसिक भ्रम की स्थिति, सिर दर्द, चक्कर, धुंधली दृष्टि की शिकायत ठीक होने के दौरान और बाद में की है. इस तरह, कोविड-19 मरीजों में न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के प्रसार जैसे सिर दर्द और भ्रम की स्थिति से कोरोना वायरस और अल्जाइमर के बीच संबंध का पता चल सकता है.

अल्जाइमर और कोविड-19 के बीच संबंध

अल्जाइमर एंड डिमेन्शिया में एक समीक्षा प्रकाशित की गई है. उसमें कोविड-19 और अल्जाइमर रोग के संभावित संबंध को जोड़ने की कोशिश की गई है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, बीमारी के साथ लोगों में लक्षणों की शुरुआत 60 साल की उम्र के आसपास जाहिर होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर लोग कोवड-19 के प्रभाव से बचे रहेंगे. हालांकिन, लंबे समय में उन्हें कई बीमारियों जैसे डिमेन्शिया, जीवन की खराब गुणवत्ता और विकलांगता से निबटना पड़ सकता है.

रिसर्च से क्या पता चलता है?

दिमाग पर कोविड-19 के लंबे और अल्पकालिक प्रभाव को समझने के लिए 30 देशों के प्रतिनिधि, अल्जाइमर एसोसिएशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन संबंध की जांच करने के लिए एक मंच पर आए हैं. जबकि कोरोना वायरस में दिमाग से जुड़ी कई खराबी उभारने की प्रवृत्ति है, दिमाग में गंभीर सूजन की वजह बनने की भी क्षमता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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