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काशीश हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फूटा जनाक्रोश, पिथौरागढ़ की सड़कों पर उतरे हजारों लोग

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🕐12:53pm Hm24x7news 18 September manoj. K

नन्ही परी’ को न्याय दो! – रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग, सीएम ने परिवार को दिया आश्वासन

हल्द्वानी/पिथौरागढ़, 18 सितंबर 2025 (संवाददाता): उत्तराखंड को हिला देने वाले 2014 के काशीश हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। मुख्य आरोपी को बरी करने के निर्णय के खिलाफ पिथौरागढ़ जिले में चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, नारे लगा रहे हैं और सरकार से मामले को फिर से खोलने तथा रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग कर रहे हैं। पीड़िता के परिवार ने फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।

घटना का काला अध्याय: 11 साल पुरानी दर्दनाक यादें

यह मामला नवंबर 2014 का है, जब पिथौरागढ़ की मात्र 6-7 वर्षीय मासूम काशीश (जिसे ‘नन्ही परी’ या ‘लिटिल निर्भया’ भी कहा जाता है) हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान लापता हो गई थी। काशीश अपने परिवार के साथ शादी में गई हुई थी, जहां मजदूर अख्तर अली नामक आरोपी ने उसे लालच देकर अपहरण कर लिया। उसके बाद काशीश के साथ दुष्कर्म किया गया और क्रूरता से हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया गया। शव की बरामदगी के बाद पूरे कुमाऊं क्षेत्र में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
पुलिस ने मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। जांच में मुख्य आरोपी अख्तर अली (एक मजदूर) के अलावा दो अन्य आरोपी सामने आए। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड को स्तब्ध कर दिया था और इसे ‘लिटिल निर्भया’ केस के रूप में जाना गया।

कोर्ट की लंबी जंग: फांसी से बरी तक का सफर

मामले की सुनवाई हल्द्वानी की दंड एवं सिविल न्यायालय में हुई। 12 मार्च 2016 को ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को फांसी की सजा सुनाई, जबकि दूसरे आरोपी को 5 वर्ष की कैद और तीसरे को बरी कर दिया।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपील के बाद हाल ही में (सितंबर 2025) जस्टिस विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की बेंच ने फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर था, जो पर्याप्त मजबूत नहीं थे। जांच में कई खामियां पाई गईं, इसलिए मुख्य आरोपी अख्तर अली और दूसरे दोषी को बरी कर दिया गया।

पिथौरागढ़ में उबाल: सड़कों पर जनसैलाब, जुलूस और नारेबाजी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर मिलते ही पिथौरागढ़ में आक्रोश फैल गया। 14 सितंबर 2025 को शनिवार को रामलीला मैदान से शुरू हुए प्रदर्शनों में मातृशक्ति, स्कूली बच्चे, व्यापारी, पूर्व सैनिक, सीमांत यूथ मोर्चा, उत्तराखंड छात्र मोर्चा और नगर निगम पार्षद शामिल हुए।

प्रदर्शनकारी गांधी चौक पहुंचे, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति के समक्ष काशीश को श्रद्धांजलि दी। नारे गूंजे – “दोषी कौन? नन्ही परी को न्याय दो!” जुलूस निकाले गए और नगर निगम परिसर में धरना दिया गया।रविवार (15 सितंबर) को प्रदर्शन और तेज हो गए। सैकड़ों लोग रामलीला मैदान में जमा हुए और उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जौलजीबी ब्लॉक में भी विरोध हुआ। संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की, जिसमें केस को रि-ओपन करने, दोषियों को सजा दिलाने और सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांगें शामिल हैं।

2 sourcesप्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार पर कमजोर पैरवी का आरोप लगाया। पीड़िता के चाचा ने कहा, “3 दिनों के अंदर रिव्यू पिटीशन न दाखिल होने पर मैं आत्मदाह करूंगा।” परिवार को फैसले की जानकारी भी रिश्तेदारों से मिली, कोर्ट से नहीं। पिता ने दुख जताते हुए कहा, “हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

सरकार का रुख: रिव्यू पिटीशन का वादा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़िता के परिवार से फोन पर बात की और आश्वासन दिया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। उन्होंने कहा, “न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।” हालांकि, प्रदर्शनकारी सरकार की पैरवी पर सवाल उठा रहे हैं।

यह मामला उत्तराखंड में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर बहस छेड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में सुधार जरूरी है ताकि निर्दोष बरी न हों और अपराधी सजा पाएं। प्रदर्शन जारी हैं, और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

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