प्रो.आरपी ममगाईं CPPGG की गवर्निंग बॉडी में नामित
The post प्रो.आरपी ममगाईं CPPGG की गवर्निंग बॉडी में नामित appeared first on Avikal Uttarakhand.
उत्तराखंड के पलायन, रोजगार और पर्वतीय विकास पर प्रो. ममगाईं का शोध नीति निर्माण में होगा उपयोगी
CPPGG में प्रो. ममगाईं का अनुभव उत्तराखंड की क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों को देगा नई दिशा: कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। मुख्यमंत्री ने दून विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक्स एवं स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के प्रमुख प्रो. आर. पी. ममगाईं को उत्तराखंड सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (CPPGG) की गवर्निंग बॉडी का सदस्य नामित किया है।
विकास अर्थशास्त्र, रोजगार, पलायन, आजीविका, गरीबी, कौशल विकास, सामाजिक समावेशन तथा सरकारी योजनाओं के मूल्यांकन के क्षेत्र में उनके तीन दशकों से अधिक के अकादमिक एवं शोध अनुभव को देखते हुए यह नामांकन उत्तराखंड में साक्ष्य-आधारित एवं क्षेत्र-विशिष्ट नीति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रो. ममगाईं को अकादमिक जगत के साथ-साथ नीति अनुसंधान और विकास संबंधी मुद्दों पर उनके लंबे अनुभव के लिए जाना जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षण, शोध और नीति परामर्श से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज (NIRDPR) में चेयर प्रोफेसर, रूरल लेबर के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दलित स्टडीज में निदेशक एवं प्रोफेसर तथा गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) से भी वरिष्ठ अकादमिक सलाहकार के रूप में जुड़े रहे हैं।
प्रो. ममगाईं ने 13 पुस्तकों का लेखन अथवा सह-लेखन किया है तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 60 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। उनका शोध कार्य केवल सैद्धांतिक अर्थशास्त्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका, गरीबी, सामाजिक बहिष्करण और पलायन जैसे जमीनी सामाजिक-आर्थिक मुद्दों के क्षेत्रीय एवं अनुभवजन्य अध्ययन पर केंद्रित रहा है। उनके अकादमिक योगदान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वे विकास की समस्याओं को आंकड़ों, फील्ड रिसर्च और स्थानीय परिस्थितियों के संदर्भ में समझने पर जोर देते हैं।
उत्तराखंड के संदर्भ में प्रो. ममगाईं के महत्वपूर्ण शोध क्षेत्रों में पलायन, रोजगार, ग्रामीण आजीविका और पर्वतीय क्षेत्रों का विकास शामिल हैं। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार एवं बेहतर आजीविका की तलाश में होने वाला पलायन, स्थानीय स्तर पर रोजगार के सीमित अवसर तथा पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के बीच विकासात्मक असमानता आज भी राज्य के प्रमुख नीतिगत मुद्दों में शामिल हैं।
प्रो. ममगाईं का दृष्टिकोण एक समान नीति के बजाय पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप पर्वत-केंद्रित और क्षेत्र-विशिष्ट विकास नीति पर जोर देता है। उनका विचार रहा है कि राज्य के 95 विकासखंड मुख्यालयों को स्थानीय स्तर पर समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। यदि इन केंद्रों के आसपास रोजगार, बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवाओं और स्थानीय उद्यमिता के अवसर विकसित किए जाएं तो स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ आसपास के गांवों में वस्तुओं और सेवाओं की मांग को भी बढ़ाया जा सकता है।
यह दृष्टिकोण CPPGG के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता, पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंच की कठिनाइयां, छोटे और बिखरे हुए बाजार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं की विशिष्ट आवश्यकताएं राज्य के लिए अधिक सूक्ष्म और क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों की मांग करती हैं।
इसी प्रकार, युवाओं के लिए कौशल विकास की नीतियों में केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। कौशल प्रशिक्षण के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हैं या नहीं, स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार मौजूद है या नहीं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर्याप्त एवं स्थायी आय उत्पन्न कर सकती है या नहीं, इन सभी पहलुओं को नीति निर्माण में शामिल करना आवश्यक है।
प्रो. ममगाईं का अनुभव गरीबी, सामाजिक बहिष्करण, भेदभाव और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों में भी व्यापक रहा है। इसलिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, ग्रामीण गरीब परिवारों, सीमांत समुदायों और अन्य वंचित समूहों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता के मूल्यांकन में उनका अनुभव महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
महिलाओं के जीवन और आजीविका से जुड़े विषय पर प्रो. ममगाईं का हालिया अकादमिक कार्य भी उल्लेखनीय है। उत्तराखंड में महिलाओं के जीवन और आजीविका में सुधार से संबंधित उनकी पुस्तक का कार्य दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सुरेखा डंगवाल के साथ किया गया है। यह कार्य राज्यपाल की “One University One Research Initiative” के अंतर्गत किया गया है। यह अध्ययन राज्य में महिलाओं के कल्याण, आजीविका और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करता है।
प्रो. ममगाईं का नीति और अकादमिक जगत के बीच सेतु के रूप में अनुभव भी उनकी नई जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बनाता है। वे लंबे समय तक Indian Journal of Labour Economics के मैनेजिंग एडिटर के रूप में भी जुड़े रहे हैं। दून विश्वविद्यालय में भी वे उत्तराखंड के विकास से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाने तथा राज्य के विकास अनुभव, गरीबी, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक चुनौतियों पर विमर्श को बढ़ावा देने में सक्रिय रहे हैं।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने प्रो. आर. पी. ममगाईं को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनका लंबा अकादमिक, शोध एवं नीति-अनुभव उत्तराखंड के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि प्रो. ममगाईं ने रोजगार, पलायन, ग्रामीण आजीविका, गरीबी, सामाजिक समावेशन और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को जमीनी स्तर पर समझने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनका अनुभव राज्य की विविध भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतियों के निर्माण में योगदान दे सकता है।
प्रो. डंगवाल ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास की चुनौतियों को केवल सामान्य आर्थिक विकास के आंकड़ों के आधार पर नहीं देखा जा सकता। रोजगार, आजीविका, मानव विकास, सामाजिक समावेशन, क्षेत्रीय संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता को समान महत्व देते हुए नीतियां तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि CPPGG की गवर्निंग बॉडी में प्रो. ममगाईं की सहभागिता राज्य की नीतिगत सोच को और अधिक शोध-आधारित एवं जन-केंद्रित बनाने में सहायक होगी।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने, युवाओं के कौशल को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने तथा पलायन की चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियों की आवश्यकता है। इस दिशा में प्रो. ममगाईं का शोध अनुभव नीतिगत विमर्श को मजबूत कर सकता है।
प्रो. ममगाईं की CPPGG में नियुक्ति से पर्वत-केंद्रित विकास, स्थानीय रोजगार सृजन, रिवर्स माइग्रेशन, युवा कौशल एवं रोजगार, ग्रामीण आजीविका, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तथा पहाड़ और मैदान के बीच विकासात्मक असमानताओं को कम करने जैसे विषयों पर नीतिगत विमर्श को गति मिलने की उम्मीद है।
ऐसा अनुभव उत्तराखंड के लिए ऐसी नीतियों के निर्माण में सहायक हो सकता है जो केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित न होकर स्थानीय समुदायों की आजीविका, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय संतुलन, मानव विकास और पर्यावरणीय स्थिरता को भी विकास के केंद्रीय मानकों के रूप में स्वीकार करें।
प्रो. आर. पी. ममगाईं के नामांकन पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित विश्वविद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि वे अपनी विशेषज्ञता एवं दीर्घ अनुभव के माध्यम से उत्तराखंड में साक्ष्य-आधारित, समावेशी और पर्वतीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप सार्वजनिक नीति निर्माण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
The post प्रो.आरपी ममगाईं CPPGG की गवर्निंग बॉडी में नामित appeared first on Avikal Uttarakhand.