जनसेवा के पाँच साल- सीएम धामी ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
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‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का दूसरा चरण शुरू
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेंगी योजनाएं
अविकल उत्तराखण्ड
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यसेवक के रूप में जनसेवा के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बीते पाँच वर्षों में सुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता देते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।
उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून तथा मदरसा बोर्ड के स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को सरकार की प्रमुख उपलब्धियां बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं, जबकि महिला आरक्षण, निवेश, पर्यटन, चारधाम अवसंरचना, स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की है, जिसके तहत जनसमस्याओं का मौके पर समाधान और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए जनता से निरंतर सहयोग की अपील की।
गौरतलब है कि पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2021 में बतौर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
पढ़ें, मुख्यमंत्री का संदेश
प्रिय प्रदेशवासियों,
आप सभी के स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद से मुख्यसेवक के रूप में जनसेवा के पाँच वर्ष पूर्ण हुए हैं। सेवा, सुशासन और जनकल्याण की यह यात्रा 1.25 करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, आकांक्षाओं और सहयोग को समर्पित है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार के संकल्प के साथ इन पाँच वर्षों में हमने विकास और सांस्कृतिक अस्मिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए। समान नागरिक संहिता (UCC), सशक्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू-कानून तथा देश में नई मिसाल कायम करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इन कदमों ने उत्तराखंड को सुशासन, समानता और पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया। युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, मातृशक्ति को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, निवेश, रोजगार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा चारधाम सहित धार्मिक एवं पर्यटन अवसंरचना के व्यापक विकास को नई गति मिली।

पूर्ण पारदर्शिता के साथ 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर प्रदान किए गए। सैनिकों, किसानों, युवाओं और मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए अनेक जनहितकारी निर्णय लिए गए। सौर ऊर्जा, होमस्टे और स्वरोजगार को नई ऊर्जा मिली तथा रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन से पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली, राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन, ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश की ग्राउंडिंग तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में उत्तराखंड के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने विकास के नए आयाम स्थापित किए है।
इसी जनसेवा के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज से “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के दूसरे चरण का शुभारंभ भी किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के बीच पहुँचकर जनसमस्याओं के समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाने तथा सेवा और सुशासन की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य करेगी।
विकसित उत्तराखंड – विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर आपके विश्वास, सहयोग और सहभागिता के साथ हम जनसेवा, सुशासन और समृद्धि की इस यात्रा को और अधिक गति और नई ऊँचाइयाँ प्रदान करने के लिए निरंतर संकल्पबद्ध हैं।
आपका विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति है।
जय हिंद!
जय उत्तराखंड!
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