गौला नदी में खनन की लीज 23 जनवरी को समाप्त,अभी तक खनन कार्य नहीं हुआ शुरू, पढ़े पूरी खबर-

गौला नदी में खनन की लीज 23 जनवरी को समाप्त,अभी तक खनन कार्य नहीं हुआ शुरू,
जीवन पांडे- गौला नदी उत्तराखंड प्रदेश का सबसे व्यवस्थित खनन माना जाता है, यहां पर 11 गेटों से 7,450 वाहनों से उप खनिज निकासी होती है, वहीं इस बार वाहन स्वामी एक प्रदेश एक रॉयल्टी , जीपीएस अनिवार्यता समाप्ति, ग्रीन टैक्स हटाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर लामबंद हैं,

जिस वजह से खनन सत्र शुरू होने के 3 माह बाद भी नदी में खनन प्रारंभ नहीं हो सका है, सिर्फ शीश महल गेट पर ही निकासी हो रही है वही शीश महल गेट पर भी सिर्फ रेता का ही उठान किया जा रहा है,
नदी में खनन के लिए पर्यावरणीय और वन्यजीव बोर्ड से अनापत्ति अनिवार्य होती है यह आनापत्तियां 10 वर्ष के लिए मिलती हैं, इनमें पर्यावरणीय अनापत्ति की मियाद 23 जनवरी को समाप्त हो जाएगी ,केंद्रीय शर्तों के अनुसार नदी में खनन के लिए तीनों अनआपत्तियों का होना अनिवार्य है एक भी अनुमति नहीं होने पर नदी में खनन नहीं किया जा सकता, ऐसे में वन विकास निगम की हालत पतली हो गई है, एक तरफ तो वाहन स्वामियों की हड़ताल की वजह से नदी में खनन शुरू नहीं हो सका वही जैसे-तैसे बमुश्किल शीश महल गेट पर उप खनिज निकासी शुरू हुई है वह भी 23 जनवरी को समाप्त हो जाएगी ,
ऐसे में वन विकास निगम को राजस्व का बड़ा नुकसान होगा, गौला नदी से हर साल करीब ₹200 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता था नदी के 10 गेट बंद होने से राजस्व का लगातार नुकसान हो रहा है, अब यदि पर्यावरणीय अनापत्ति नवीनीकरण नहीं हुआ तो जो भी थोड़ा बहुत राजस्व की प्राप्ति हो रही थी वह भी बंद हो जाएगी,
ऐसे में वन निगम के अधिकारी लीज नवीनीकरण के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं वहीं महाप्रबंधक विवेक पांडे , आरएम के एन भारती ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है और पर्यावरणीय अनापत्ति 23 जनवरी से पूर्व नवीनीकरण के लिए वह कागजी कार्रवाई में जुट गए हैं।