दिल्ली के लाठीचार्ज का दर्द उत्तराखंड ने महसूस किया
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जंतर-मंतर लाठीचार्ज के विरोध में दून में प्रदर्शन
बेरोजगारों ने भी फिर दिखाए तेवर
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और एनटीए को समाप्त करने की मांग
भर्ती विज्ञापन और परीक्षा कैलेंडर जारी करने की उठी मांग
अविकल उत्तराखण्ड
देहरादून। लंबी खामोशी के बाद देहरादून में युवा, बेरोजगारों और विभिन्न संगठनों ने नये सूरे से हुंकार भरी। देहरादून की सड़कों पर केंद्र सरकार के विरोध में जबरदस्त नारेबाजी को गयी। उधर, दिल्ली के लाठीचार्ज व राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के पीएम आवास के बाहर धरना देने से उत्तराखण्ड में भी विशेष हलचल महसूस की गई।
युवाओं के रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सोमवार को देहरादून में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक संगठनों और बेरोजगार युवाओं ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर सरकारों के खिलाफ आवाज बुलंद की।

एक ओर, जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया, वहीं दूसरी ओर बेरोजगार युवाओं ने लंबित भर्तियों और परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग को लेकर सचिवालय कूच किया।
परेड ग्राउंड के निकट विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता एकत्र हुए और सतीश धौलाखंडी के नेतृत्व में जनगीतों तथा नारेबाजी के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने तथा सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग उठाई।

महिला मंच की जिला संयोजक निर्मला बिष्ट ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं और नीट-यूजी पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की निंदा की।
मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि एनटीए जैसी नाकाम एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ।
प्रदेश महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष आशा मनोरमा डोबरियाल ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई। प्रदर्शन में कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, महिला मंच, एसएफआई और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने दिखाए तेवर
उधर, उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े बेरोजगार युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर सचिवालय कूच किया। संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में निकले प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद बेरोजगार युवा वहीं धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करते रहे।
बेरोजगारों ने फॉरेस्ट गार्ड के लगभग एक हजार पदों सहित सहायक लेखाकार, स्केलर, कनिष्ठ सहायक, पुरुष एवं महिला कांस्टेबल तथा विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग की। इसके अलावा पुलिस दरोगा, वन दरोगा, आबकारी दरोगा, बंदी रक्षक, सचिवालय रक्षक समेत कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की आरओ, एआरओ, जेई, एई, ईओ, ईपीएस और एएसओ समेत विभिन्न परीक्षाओं के लिए परीक्षा कैलेंडर जारी करने, ऊर्जा निगमों और अन्य विभागों में लंबित भर्तियों को शीघ्र शुरू करने तथा परीक्षा परिणाम घोषित करते समय सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, न्यायालय के आदेशानुसार सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के शेष चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति देने की मांग भी उठाई गई।

प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। सचिवालय कूच में बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा शामिल रहे।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?
- दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की न्यायिक जांच।
- पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
- छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा।
- शांतिपूर्ण आंदोलनों पर पुलिस दमन बंद किया जाए।
- छात्रों की मांगों पर सरकार वार्ता करे।
बुधवार को फिर होगा प्रदर्शन
प्रदर्शनकारी संगठनों ने घोषणा की है कि 22 जुलाई को गांधी पार्क, देहरादून में फिर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
इन संगठनों ने लिया हिस्सा
- उत्तराखंड इंसानियत मंच
- उत्तराखंड महिला मंच
- स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई)
- आम आदमी पार्टी
- उत्तराखंड क्रांति दल
- विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठन
दिल्ली से लौटे छात्रों ने क्या कहा
दिल्ली छात्र आंदोलन में शामिल होकर लौटे छात्रों ने दावा किया कि जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की आवाज लाठियों से नहीं दबाई जा सकती। लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।”
— प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं का साझा संदेश
प्रदर्शन की झलक
- परेड ग्राउंड से घंटाघर तक मार्च
- केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी
- जनगीत और रैप के जरिए विरोध
- दिल्ली से लौटे छात्रों का सम्मान
- अगले चरण के आंदोलन का ऐलान
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