उत्तराखण्ड साइबर अपराध प्रबंधन में टॉप-5 राज्यों में शामिल
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PMO की PRAGATI समीक्षा में उत्तराखण्ड पुलिस की बड़ी उपलब्धि
US4C, e-Zero FIR और मनी रिस्टोरेशन प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन को मिली राष्ट्रीय पहचान, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। साइबर अपराध नियंत्रण और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उत्तराखण्ड पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की 6 अगस्त को आयोजित PRAGATI समीक्षा बैठक में प्रस्तुत स्टेट/केंद्र शासित प्रदेश प्रदर्शन मैट्रिक्स (1 जनवरी से 31 जुलाई, 2026) के अनुसार उत्तराखण्ड को साइबर अपराध प्रबंधन के क्षेत्र में देश के शीर्ष पांच राज्यों में स्थान मिला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर उत्तराखण्ड पुलिस, विशेष कार्यबल (STF) और संबंधित सभी इकाइयों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता राज्य सरकार की “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” की कार्यसंस्कृति, आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग और समर्पित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड पुलिस भविष्य में भी नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और सुरक्षित साइबर वातावरण के निर्माण के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।
समीक्षा के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की विभिन्न राष्ट्रीय साइबर पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के आधार पर किया गया। इसमें S4C की स्थापना, e-Zero FIR, शिकायत निस्तारण प्रणाली (GRM), मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM), सहयोग पोर्टल, समन्वय पोर्टल, सूचना साझाकरण, क्षमता निर्माण, साइबर हॉटस्पॉट विश्लेषण और जन-जागरूकता अभियानों जैसे मानकों को शामिल किया गया।
उत्तराखण्ड का प्रदर्शन अधिकांश प्रमुख मानकों पर प्रभावी पाया गया। विशेष रूप से US4C की स्थापना, e-Zero FIR, GRM, MRM, सहयोग और समन्वय पोर्टल के प्रभावी उपयोग तथा साइबर जागरूकता अभियानों के आधार पर राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पांच राज्यों में स्थान प्राप्त हुआ।
राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (US4C) की स्थापना की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए पृथक भवन और आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास हेतु बजट का भी प्रावधान किया गया है। STF ने I4C के सहयोग से साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच, तकनीकी सहायता, अंतरराज्यीय समन्वय और पीड़ित सहायता व्यवस्था को सुदृढ़ किया है।
राज्य में e-Zero FIR प्रणाली के तहत पात्र शिकायतों पर समयबद्ध मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ितों की धनराशि सुरक्षित कराने और वापस दिलाने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान, साइबर हॉटस्पॉट की निगरानी, पुलिस कर्मियों का नियमित प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम नागरिकों के लिए व्यापक साइबर जागरूकता अभियान भी राज्य की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय की समीक्षा में देश के शीर्ष पांच राज्यों में स्थान मिलना उत्तराखण्ड पुलिस के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि पुलिस का लक्ष्य केवल साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पीड़ित को त्वरित सहायता उपलब्ध कराना और नागरिकों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है।
उत्तराखण्ड पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे OTP, UPI PIN, CVV तथा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक, मोबाइल ऐप या कॉल पर भरोसा न करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल
1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें या
www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि सुरक्षित रखने और वापस दिलाने की कार्रवाई की जा सके।
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