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उत्तराखंड शिल्प रत्न पुरस्कार: हल्द्वानी के तीन शिल्पी सम्मानित –

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🕐 9:31pm 17 September Hm24x7news Manoj. K

देहरादून, 17 सितंबर 2025 (समाचार एजेंसी): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज एक विशेष समारोह में राज्य के 11 उत्कृष्ट हस्तशिल्पियों को ‘उत्तराखंड शिल्प रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इस पुरस्कार का उद्देश्य राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को बढ़ावा देना और शिल्पियों को प्रोत्साहित करना है। समारोह में सीएम ने शिल्पियों की रचनात्मकता की सराहना की और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान पर जोर दिया। विशेष रूप से हल्द्वानी और नैनीताल क्षेत्र से तीन शिल्पियों को इस सम्मान से नवाजा गया। नीचे समाचार की प्रमुख बिंदुवार जानकारी दी गई है:

समारोह का स्थान और आयोजन:


  • कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित किया गया। सीएम धामी ने विभिन्न हस्तशिल्प स्टॉलों का निरीक्षण किया और शिल्पियों से बातचीत की।

पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की सूची:


  • कुल 11 शिल्पियों को सम्मानित किया गया, जिनमें विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि शामिल थे। सूची इस प्रकार है:
    • उत्तरकाशी से: श्रीमती जानकी देवी, श्रीमती भागीरथी देवी, श्री महिमानन्द तिवारी।
    • बागेश्वर से: श्री इन्द्र सिंह।
    • अल्मोड़ा से: श्री लक्ष्मण सिंह, श्री भुपेन्द्र सिंह बिष्ट।
    • नैनीताल/हल्द्वानी से: श्री जीवन चन्द्र जोशी (हल्द्वानी), श्री मोहन चन्द्र जोशी (हल्द्वानी), श्री जानकी बिष्ट (नारायण नगर मल्लीताल, नैनीताल), श्री जगदीश पाण्डेय (क्वालिटी कॉलोनी हल्दूचौड़, हल्द्वानी)।
    • चमोली से: श्री प्रदीप कुमार, श्रीमती गुड्डी देवी।

हल्द्वानी के तीन शिल्पियों पर विशेष फोकस:

  • श्री जीवन चन्द्र जोशी: हल्द्वानी के निवासी, जो अपनी अनोखी हस्तशिल्प कला के लिए जाने जाते हैं। वे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुके हैं।
  • श्री मोहन चन्द्र जोशी: हल्द्वानी से ही, पारंपरिक शिल्प में विशेषज्ञता रखते हैं।
  • श्री जगदीश पाण्डेय: हल्दूचौड़ (हल्द्वानी) के निवासी, जिन्होंने लकड़ी की नक्काशी और अन्य हस्तशिल्प में योगदान दिया है। ये तीनों शिल्पी नैनीताल जिले की हस्तशिल्प धरोहर को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सीएम धामी के मुख्य उद्गार:

  • उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प कला अपनी पारंपरिक डिज़ाइन और उच्च गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
  • हर्षिल की ऊनी शाल, मुनस्यारी-धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी और पिछौड़े जैसे उत्पादों ने राज्य को वैश्विक पहचान दिलाई है।
  • भांग और बांस के रेशों से बने वस्त्रों की मांग बढ़ रही है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों की सराहना की, जो शिल्पियों के विकास में सहायक हैं।
  • केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान से शिल्पियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है।

राज्य सरकार की पहलें:

  • शिल्पी पेंशन योजना, शिल्प रत्न पुरस्कार, बुनकर क्लस्टर सशक्तिकरण, कौशल विकास प्रशिक्षण, मेलों-प्रदर्शनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
  • स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने पर जोर, जो आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगा और शिल्पियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
  • सीएम ने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के शिल्पी अपनी रचनात्मकता से राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देंगे।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह पुरस्कार राज्य सरकार की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा संचालित है, जिसमें शिल्पियों को नकद पुरस्कार, प्रमाण पत्र और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
  • समारोह में शिल्पियों ने अपनी कृतियों का प्रदर्शन किया, जिससे स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिला।
  • यह आयोजन राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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