आवारा गोवंशीय पशु बनेंगे किसानों के ATM, सरकार लाई है छप्पर फाड़ स्कीम

इन दिनों पूरे देश में पशुधन गणना चल रही है. इसमें पालतू और निराश्रित पशुओं को गिनती की जा रही है. इस गणना में गाय, बैल, भैंस, बकरी, घोड़े, खच्चर, मुर्गी, बिल्ली और कुत्ते गिने जा रहे हैं.
इस 21वीं पशुधन गणना की मदद से शहर में घूम रहे आवारा गोवंशीय पशुओं के भी सटीक आंकड़े सामने आएंगे. इन निराश्रित गोवंशीय पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. कई बार तो ये वाहन चालकों की मौत तक का कारण बन जाते हैं. इनसें आम लोगों को भी काफी दिक्कतें होती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की ओर से इन निराश्रित गोवंशीय पशुओं को गोद लेने के लिए ‘ग्राम गोसेवक योजना’ चलाई जा रही है. इसके अंतर्गत कोई भी ग्रामीण क्षेत्र का व्यक्ति इन निराश्रित गोवंशीय जानवरों को गोद ले सकता है.
खुली बैठक में प्रस्ताव
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित पशु चिकित्सालय की पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हेमा राठौर कहती हैं कि ग्राम गोसेवक योजना के तहत पांच नर पशुओं को पालने के लिए 80 रुपये प्रति पशु प्रति दिन के हिसाब से सरकार अनुदान राशि देगी. इस योजना का लाभ लेने के लिए कोई भी ग्रामीण अपनी ग्राम सभाओं में खुली बैठक में प्रस्ताव रख सकता है. प्रस्ताव के पारित होने के बाद ग्रामीण पशुपालन विभाग या नजदीकी पशु चिकित्सालय में आकर आवेदन कर दें. पशुआलन विभाग से अनुमति मिलने के बाद निराश्रित गोवंशीय पशुओं को पाल कर ग्रामीण इस योजना का लाभ ले सकेंगे.
समस्या से छुटकारा
सरकार की इस योजना से काफी हद तक निराश्रित पशुओं की समस्या से छुटकारा तो मिलेगा ही साथ ही आवारा पशुओं को घर भी मिलेगा और आए दिन इनके कारण होने वाली दुर्घटनाएं भी कम होंगी. ग्रामीण भी इन पशुओं का उपयोग खेती और अन्य कामों में कर पाएंगे. इससे उनकी आमदनी भी होगी और लोगों को भी आवारा घूम रहे गोवंशीय पशुओं के डर से भी मुक्ति मिलेगी.